हर   नए   मोड़   पर   बदलते   हैं   रिश्ते,

ठंडे और गर्म आँसुओं के समंदर है रिश्ते,

चाहत और नफ़रत के बेशुमार है किस्से

सदा ही अपनों की बाहों में मरते हैं रिश्ते।

- © कामिनी मोहन पाण्डेय