हर  देह  का  चूल्हा ये हैं जलाती। -© कामिनी मोहन।'s image
Poetry1 min read

हर देह का चूल्हा ये हैं जलाती। -© कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan June 24, 2022
Share0 Bookmarks 40332 Reads1 Likes
हर  देह  का  चूल्हा ये हैं जलाती।
साँसों की धौंकनी एकता है लाती। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts