दर्द की तस्वीर ज़ेहन में
अनुभव करते हैं।
सब रूपक स्पष्ट और अस्पष्ट के
बीच प्रतिबिंबित होते हैं।
एक दर्द अंदर और एक बाहर
प्रेम धार लिए उन्मुख रहते हैं।
अवधारणाओं का आंदोलन देखते हैं
शिलालेख पर उत्कीर्ण करते हैं।
दर्द निर्माण को पूरा करते हुए
शिखर पर जाकर वापस होते हैं।
मिट्टी की चाहत में
मिट्टी होने तक चलते रहते हैं।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।


