अनुभव से कहता सुनो बात स्वर्ण सी शुद्ध। युद्ध ना जिसको जीतता उसे जीतता बुद्ध।   दया प्रेम करूणा क्षमा बाहर भीतर शुद्ध। जिसने अपना ये लिए बो ही गौतम बुद्ध।   घृणा प्रेम से जीतिए कभी करो ना युद्ध।‌ मंत्र यही सिखला गये भगवन गौतम बुद्ध।