सपनों को उड़ान चाहिए

 इक बेटी की भी कीमत, कोई उससे जाके पूछ ले

जहां जन्में बेटे और बेटी भी जन्म ले।।

 

औलाद पाने को भी जब कोई यूं तरसता है

हर अक्ष क्यों उस समय पानी बरसता है।।

 

क्यों नहीं याद आतीं अत्याचारों की कहानियां

हर कदम मिटाई जातीं क्यों बेटी की निशानियां।।

 

मान करो जिस दिन, बेटी का किरदार हो

क्या होगा बिस्तार यहां और कैसा ये संसार हो।।

 

कभी कोख में मर जाती, कभी बचपन मेरा दब जाता

निःसंतान होकर ही क्यों मानव है फिर पछताता।।

 

कभी कुपोशण की षिकार, कभी होता है दुराचार

बेटों की खुशियों जैसा होता नहीं क्यों विचार।।

 

रिष्ते-नातों के जाल में, हां मैं ही तो फंसती हूं

सपने सारे सूने छोड़, मैं जिंदा सी धंसती हूं।।

 

मुझे नियम-निर्देष नहीं, बस सम्मान चाहिए

हर कदम जिल्लत भरा ना अपमान चाहिए।।

 

मैं भी बेटों सी जन्मीं, मुझे बस पहचान चाहिए

तुच्छ सपने हैं मेरे भी, उन्हें बस उड़ान चाहिए।।

 

कृत कमल वीर सिंह

उर्फ कमलबिजनौरी

ग्राम-खाई खेड़ा

जिला-बिजनौर (0प्र0)

मो0- 7309561081