(इस देश पर मर मिटने वाले वीर सपूतों को नमन समर्पित कविता)

 

नमन्.........वीरों को

 

नमन है उन वीरों कों

जो देश के रक्षक कहलाते हैं

भारत मां की लाज बचाने

दिलो-जां की बाजी लगाते हैं।।

 

आशीर्वाद है मात-पितों का

बहनों ने दिया वचन उनको

भाईयों का गर्व है साथ उनके

साहसी पत्नी ने किया उनको ।।

 

हर जगह का मिट्टी-पानी,

फौलादी इन्हे बनाते हैं

सहस्रों हाथों की दुआएं इन्हें

ऊॅचाईयों तक ले जाते हैं ।।

 

बैठे हैं जो भारतवासी, आज ठंडी हवाओं में

घूमतें हैं लोग जहां-तहां सारी फिजाओं में

इन्हीं सांसों की खातिर, त्याग-बलिदान है

रहे हर सांस सुरक्षित, मात्र इतना अभिमान है।।

 

अपनी फौलादी बाहों में अदम्य साहस ये भरते हैं,

देश-विरोधी हमलों को यूं नेस्तानाबूत करते हैं,

दहल उठता है दुश्मन वो और सहम जाता है

देशभक्ति में चूर जब, ये वीर हमारे लड़ते हैं ।।

 

वाह रे! उनकी शहीदी, सहसा दिल भर आया है,

मात्र बलिदानों से उनके आज चैन--अमन छाया है,

शोक संवेदनाएं हैं उनके लिए, मौन मन से आया है,

मैं क्या अर्पण करूं उन्हें, बस शब्दनमन आया है ।।