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एकता - kavita by कमल ’बिजनौरी’

(घर, परिवार, समाज, देश की एकता-अखण्डता के लिए कविता)

एकता

 

मोहब्बत की नजर से तो, कड़े पत्थर पिघल जायें

चलें महादेव की राह पर, जहर दिल का निगल जायें।।

 

के रिश्ते और नातों का, सिला तो यूं ही चलता है

बदलते हम नहीं यारों, ये रिश्ता रंग बदलता है।।

 

खफा है अपने अपनों से, चलो सबको ये समझाएं

मिटा के दूरियां दिल की, दिलों से फिर से अपनाएं।।

 

तेरा हर राबता मुझसे, मेरा हर राबता तुझसे

चुभन सी

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