अज़्म अपना इस बार भी वही सालों पुराना है,
मुफलिसी में पलते बच्चों को बढा़ना है,
ना किसी से शिकवा ना गिला रखना है, सो
दर्द देने वालो को भी हमदर्द बनाना है।
....कमल पुंडी़र


अज़्म अपना इस बार भी वही सालों पुराना है,
मुफलिसी में पलते बच्चों को बढा़ना है,
ना किसी से शिकवा ना गिला रखना है, सो
दर्द देने वालो को भी हमदर्द बनाना है।
....कमल पुंडी़र