सच तो सच हैं सच ही रहता है
सच ना घटता हैं ना बढ़ता हैं
वक्त की फितरत हैं बदलते रहना
सच की फितरत हैं सच ही रहना
चाहे जैसे भी सजा दो, झूठ झूठ ही रहता हैं
झूठ की तो कोई इंतहा ही नही
कुछ कड़वा सच बोलने वाले होते हैं
कुछ मक्कार झूठ बोलने वाले होते हैं
.कमल पुंडी़र


