हम दो तीन थे तब, आज तीन सौ पार हो गए

तुम बहुमत में थे तब, आज बावनिए हो गए


हम कुछ कर गये ऐसा के विश्व पटल पे छा गए

और तुम आज बिन पेंदी के लोटा हो गए



...कमल पुंडी़र