मैं हर समझ समझ ही नही पाया।
एक तुझे समझने के बाद।
मैं मोड़ता खुद को किस सिम्त ।
एक तेरी याद आने के बाद।
रक्स कर रही थी उंगुलिया ख्वाब में।
मैं और क्या बनाता तेरी सूरत बनाने के बाद।।


मैं हर समझ समझ ही नही पाया।
एक तुझे समझने के बाद।
मैं मोड़ता खुद को किस सिम्त ।
एक तेरी याद आने के बाद।
रक्स कर रही थी उंगुलिया ख्वाब में।
मैं और क्या बनाता तेरी सूरत बनाने के बाद।।