
रेत ही रेत थी पानी ही पानी था चारो तरफ
मैं तैरकर पार ना करता तो क्या करता
तूने मेरी वफा़ओ का सिला ही कुछ ऐसा दिया
मैं दिल को नासू
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रेत ही रेत थी पानी ही पानी था चारो तरफ
मैं तैरकर पार ना करता तो क्या करता
तूने मेरी वफा़ओ का सिला ही कुछ ऐसा दिया
मैं दिल को नासू