थक गया हूँ आराम करते करते ऐ जिंदगी।
अब तो कोई रास्ता तू दिखा ऐ जिंदगी।।
धुंधला-धुंधला सा अंधेरा छा रहा हैं चारों तरफ ऐ जिंदगी।
अब तो कोई रास्ता तू दिखा ऐ जिंदगी।।
अब तो ख्वाहिशें भी मेरीं रोने लगी है, आत्मा का तालाब भी सूखनें लगा हैं ऐ जिंदगी।
इससे पहले के जख्म़ नासूर बनने लगे, अब तो कोई रास्ता तू दिखा ऐ जिंदगी।।
जानता हूँ उलझना मज़बूरी हैं मेरी कातिल हवा से बाहर की ऐ जिंदगी।
पर भटकना तो पडे़गा गलियों में दो-जून की रोटी के लिए ऐ जिंदगी।
अब तो कोई रास्ता तू दिखा ऐ जिंदगी........
.......कमल पुंडी़र


