कमल का पुष्प
अमूल्य कीचड़ में पनपता,खिलता,संवरता हैं कमल।
अशुध्दता से अछूता रहता हैं कमल।
खिलकर भंवरों, मधुमक्खियों का झूला बनाता हैं कमल। बीज,फल,फूल लिये, कर्मो की गति बताता हैं कमल।
प्रतीक हैं दिल की पवित्रता का, 'आज' में जीता हैं कमल ।
पुष्ष राष्ट्रीय यूँ हीं नहीं हैं, सबका दर्द जानता हैं कमल।।


