घर से निकले हैं तो चलो यूँ कर ले।
एक गुब्बारे बेचते बचपन को फिर संवारा जाए।
नई राह जगाकर उसमे, फिर पढा़या जाए।
सपनो को देकर उडा़न उसके, फिर मंजिल तक पहुँचाया जाए।।।
..कमल पुंडी़र


घर से निकले हैं तो चलो यूँ कर ले।
एक गुब्बारे बेचते बचपन को फिर संवारा जाए।
नई राह जगाकर उसमे, फिर पढा़या जाए।
सपनो को देकर उडा़न उसके, फिर मंजिल तक पहुँचाया जाए।।।
..कमल पुंडी़र