या रब......अपनी गलतियों को परख सकूँ, ऐसी नजर देदूसरों की कमियों को नजर अंदाज कर सकूँ, ऐसा हुनर देअपनी अच्छाईयों पर गुमां करूँ, ऐसा ना लम्हा देदूसरों के गुणों को अपना सकूँ, ऐसा इल्म दे....कमल पुंडी़र
या रब......
अपनी गलतियों को परख सकूँ, ऐसी नजर देदूसरों की कमियों को नजर अंदाज कर सकूँ, ऐसा हुनर दे
अपनी अच्छाईयों पर गुमां करूँ, ऐसा ना लम्हा देदूसरों के गुणों को अपना सकूँ, ऐसा इल्म दे
....कमल पुंडी़र