अपनी मर्जी से कहाँ जिंदा हैं लोग
कुछ तो मजबूरियाँ होगी के जिंदा हैं लोग
अब तो सदाये देकर भी क्या हासिल
किसी और की शर्तो पे जिंदा हैं लोग
अब तो मर ही जाऐ तो मलाल कैसा
वैसे भी कहाँ अब जिंदा हैं लोग
अब तो ऐसा लगता हैं 'कमल'
बिन खुदा के ही जिंदा हैं लोग..
..कमल पुंडी़र


