इंतजार करते करते लाल सूर्ख हो गयी हैं आँखें

आँसूओं का समन्दर भी सूखा गयी हैं आँखें


गुलाबी दिसंबर और उस पे सर्द हवाओं का सितम

एहसासो का समन्दर भी सूखा गयी हैं आँखें


जिंदगी अब बता तूझे मुझसे गिला क्या है

सोचते सोचते ये पथरा सी गयी है आँखें


...कमल पुंडी़र