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आज फिर मैं

आज फिर मेरे आँगंन का फूल मुरझाया हैं। 

आज फिर मैं भँवरें तितलियाँ लेकर आया हूँ।    


आज फिर मैंने दर क्या खुला छोड़ दिया।      

आज फिर मेरे आँगंन में एक घायल परिंदा आ गया।


आज फिर मेरी ब

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