इल्जामो की बाते सुन कर भी, दगा तू देगा यू शक नहीं करते....
खुश है तू उस की बाहो में, आलिंगन की किसी उम्मीद पर अब हम नहीं मरते...
मोहब्बत तेरे हर दिए जख्म से है, शौक से अपने उन घावों को हम नहीं भरते....
कितनी ही वफाओ से दहल कर बैठे है, छोटी सी तेरी बेवाफ़ाई से कैसे डरते....

