धुप छाँव की साँसों पे चले नंगे पाँव ज़िन्दगी
बिना कोई सवाल पूछे बिना कोई जवाब दिए
वक़्त की सुई में डूबती उभरती ज़िन्दगी
मौझों की रवानी सी आती जाती
साँसों पे थमी ज़िन्दगी साँसों पे थमी ज़िन्दगी
धुप छाँव की साँसों पे चले नंगे पाँव ज़िन्दगी
नंगे पाँव ज़िन्दगी ।
झरनों के बहेते पानी से नदी संग बहेती
आगे आगे भागे है पीछे छोड़े पाँव के निशा
गले मिल लो ज़िन्दगी से,
ना मिलेगी दोबारा ज़िन्दगी
ख़याल रखना हाथों स उम्र फिसले ना ज़िन्दगी
हाथों से उम्र ज़िन्दगी
धुप छाँव की साँसों पे चले नंगे पाँव ज़िन्दगी
नंगे पाँव ज़िन्दगी ।
पत्ती फूल की खिले है काँटों को ढके ज़िन्दगी
अपनी ही चुबन को सहकार साँसे लेती चले
गिरे संभाले दुःख की चाद्दर ओढ़े चले ज़िन्दगी
आंसुओं से भिगोती सुखाती चाद्दर ज़िन्दगी
चाद्दर ज़िन्दगी
धुप छाँव की साँसों पे चले नंगे पाँव ज़िन्दगी
नंगे पाँव ज़िन्दगी ।


