बहुत मिले है उसे राह-ए-मोहब्बत में वफ़ा निभाने वाले,

रोज-रोज नए आते है शहर में चेहरे आने-जाने वाले।

 

मैं दर पर मर भी जाँऊ तो उसको यकीन नही आता,

इक इल्जाम नही आता जिनके हो हजारो चाहने वाले।

 

खत, तस्वीर, यादे ना जाने क्या क्या जलाया मैंने,

पर मिल ही जाते है शख्स मुझे, तुझे याद दिलाने वाले।

 

जमाना कहता है इश्क़ का इज़हार करना जरूरी है,

इश्क़ बेसुमार लुटाते है खुद को शायर कहलाने वाले।