इस सावन की झड़ी में तुम याद बहुत आते हो,

जो याद आये तो अच्छी बुरी सब यादे संग ही लाते हो,

जो बरसे बरखा धीमे धीमे,

तो मीठी यादों की छुअन से सारी नाराज़गी मिटा जाते हो,

जो गरजे ये तुफानो सा तो सारी तकलीफे फिर बिखेर जाते हो,

फिर याद रह जाता है कि कैसे अपने प्यार में तुम मुझे सिर्फ दर्द दिलाते हो,

क्या कहूँ, किससे कहूँ कि,

इस सावन में तुम कितना याद आते हो,

बस ये कि,

इस सावन की झड़ी में तुम मझे याद बहुत आते हो।

-krishvi.kajol✨