मुझे इस उन्मुक्त गगन मेंकुछ देर तो उड़ने दो,इच्छाएं हैं जो दिल में मेरीउनका कुछ अंश तो सच होने दो,क्यों नियमो में बाँधा हैकुछ दूर तक तो चलने दो,पूरी नहीं तो ना सहीपर खुद की थोड़ी ज़िन्दगी तो जीने दो ।
मुझे इस उन्मुक्त गगन मेंकुछ देर तो उड़ने दो,
इच्छाएं हैं जो दिल में मेरीउनका कुछ अंश तो सच होने दो,
क्यों नियमो में बाँधा हैकुछ दूर तक तो चलने दो,
पूरी नहीं तो ना सहीपर खुद की थोड़ी ज़िन्दगी तो जीने दो ।