तेरे लफ़्ज़ शायर की क़लम से कम नहीं,
तेरी खामोशी किसी ज़ख्म से कम नहीं.
नकाब,दर्द,इश्क़,ख़ुशी,सब लेके घुमते है,
ये लोग भी चलते म्युजिअम से कम नहीं.
जिंदगी तु पल भर में रंग बदलने लगती है,
वाकई में तु भी किसी मौसम से कम नहीं.
हकिम दवा के बगैर भी मैं ठीक हो जाऊंगा,
मेरी मां की दुआ किसी मरहम से कम नहीं.
हर कोई यूही माथे पे तिलक नहीं लगाता,
हिंदुस्तान कि मिट्टी किसी कुमकुम से कम नहीं.
महफ़िल में सारे लोग मदहोश हो जाते है,
क्यूं की मेरी ग़ज़ल किसी सनम से कम नहीं.
कैलाश.विझुडा.


