मंदिर,मस्जिद में भी कड़ी से कड़ी पहरेदारी है,
यानी कि अंदर तूं नहीं कोई पैसे का पुजारी है.
नज़रों से कत्ल करने का तरीका जब से आया,
तब से सारे कातिलों के शहर में बे-रोज-गारी है.
अपने दर्द का जिक्र सभी के सामने मत कर,
ज़ख्म कुरेद ने की रस्म आज भी यहां जारी है।
पौधे को पाल पोस कर में ने पैंड बना दिया,
फल दें ना या ना दें ना उसकी जिम्मेदारी है।
उसे रोता हुआ देख कर बिना जाने दिल दे दिया
हमें नहीं पता था की उसे रोने की एक बिमारी है
मेरे यार! दिल ना लगा तूं दर्द सह नहीं पाएंगा,
तजुर्बे से कहता हूं बोझ ए इश्क़ काफ़ी भारी है
ये इश्क़ अपनी उंगलियों पर नचा रहा है मुझे,
अबतो लगने लगा है मैं बंदर हूं और वो मदारी है
कैलाश.विझुडा.
