पेड़-पौधे,फूल,पानी सब काले पड़ गए,

और आदमी को जीने के लाले पड़ गए.


जुगनू की पहचान ही ये अंधेरा है लेकिन,

उनका दर्द ये है,कि पीछे उजाले पड़ गए.


वो थे तो दिल का मकान साफ़ रहता था,

लहु नब्स लिवर सब बर्तनमें जाले पड़ गए.


इश्क़ का जाम पी के अंगारों पे चल दिये,

जब नशा उतरा तो दिल में छाले पड़ गए.


बरसों से एक ही किरदार निभा रहा है वो,

दुसरा मिला तो कहानी में ताले पड़ गए.


कैलाश.विझुडा