सियासते आती जाती रहेगी तुम ईमान बचाओ,
हिन्दुस्तान अंदर से बंट रहा है हिन्दुस्तान बचाओ।
मुझे दो चार ही नजर आ रहे हैं बाकि सब मरे हुए हैं,
ये दो चार मर जाएं उस से पहले इन्सान बचाओ।
गुलज़ार पे खतरा है क्यूं कि भंवरे बिच्छू बन गये है,
इसलिए कोमल कलियां फूलों कि मुस्कान बचाओ।
बेमानी,हवस के नशे में एक दुजे को काटते जा रहे है,
मिलजुलकर रहने वाला भारत का अभियान बचाओ।
एक दुजे के लिए मर मिटना ही तिरंगे कि शान है,
ना कि एक दुजे को काटना इसलिए वो शान बचाओ।
कैलाश विझुंडा।
