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आज कल !!


क्यूं एक इन्सान इन्सानसे जल रहा है आज कल,हर तरफ एक यहीं किस्सा चल रहा है आज कल !!

परिंदे दाने खिलाने वाले हर शख्स पे भरोसा मत कर,सभी के अंदर आस्तिन का सांप पल रहा है आज कल !!

कैलाश.विझुडा.

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