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आई


एक शख्स मेरा रंग,खुशबू सब साथ ले गया,तब से मुझे मिलने एक भी तितलियां नहीं आईं.

हकिकत छोड़ो ख्वाब में भी मुझे याद नहीं किया,सुबूत है काफ़ी अरसे से हमें हिचकियां नहीं आईं.

के.जे.विझुडा

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