अपनो पे गरम गैरो पर नरम ॥ ये कैसा दस्तूर है ॥ मै हंस हंस तुम्हे पुकारू ॥ तू दिल से कोसो दूर है ॥ जब आफिस से घर आता हूँ ॥ घूर के अकड़ दिखाती हो ॥ बदन में मेरे दर्द हो रहा ॥ नखरे बहुत बनाती हो ॥ जब हाथ लगाता मै तुमको तो ॥ कहती चढ़ा बुखार फितूर है ॥ अपनो पे गरम गैरो पर नरम ॥ ये कैसा दस्तूर है ॥ मै हंस हंस तुम्हे पुकारू ॥ तू दिल से कोसो दूर है ॥