है अभिलाषा जीने की तो ॥
पर्वत से टकराना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥
चलते रहना अपने पथ पर ॥
संघर्ष से पीछे मत हटना ॥
धक्के बहुत लगेंगे तुमको ॥
हठ करके तुम वही पे डटना ॥
अपनी इच्छा शक्ती को खुद ॥
अपने अंदर जगाना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥
लोक लाज सब जांच परख के ॥
अपना कर्म निछावर करना ॥
भिड़े गे तुमसे अन्यायी जब ॥
बिल्कुल उनसे तुम न डरना ॥
अन्यायी की वेदी पर तुमको ॥
सच का दीप जलाना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥