तुम देखो ना..! 

तुमसे मिलने कौन आया है.?

यह सावन फ़िर से लौट आया है।


अधूरे ख़्वाबों को साथ लाया है,

कुछ सवालों के जवाब लाया है।

भूले बिसरे गीतों की राग लाया है,

नम आंखों में तेरी याद लाया है।।


तुम देखो ना..! 

तुझसे मिलने कौन आया है.?

यह सावन फ़िर से लौट आया है।


ठंडी-सी पुरवाईयाँ जो संग लाया है,

हरी-सी धरा का जो रंग लाया है।

गुमसुम यादों की सनक लाया है,

खनकती चूड़ियों की खनक लाया है।।


तुम देखो ना..! 

तुझसे मिलने कौन आया है.?

यह सावन फ़िर से लौट आया है।


रिमझिम बूंदों की फुहार लाया है,

बिछड़े मितों का दुलार लाया है।

दिलो में तन्हाई बेक़रार लाया है,

तन और मन मे प्यार लाया है।।


तुम देखो ना..! 

तुझसे मिलने कौन आया है.?

यह सावन फ़िर से लौट आया है।


             -कैलाश हीराणी