मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर ना कोई गुरुद्वारा बोले,मज़हबों की तालीम में इंसानियत की पोथी कोई ना खोले।एक देह है,एक रक्त है एक ही है यहाँ पर हवा,मग़र सियासत का काम यही ज़हर नफ़रत का इसमें घोले।
मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर ना कोई गुरुद्वारा बोले,मज़हबों की तालीम में इंसानियत की पोथी कोई ना खोले।
एक देह है,एक रक्त है एक ही है यहाँ पर हवा,मग़र सियासत का काम यही ज़हर नफ़रत का इसमें घोले।