पिता's image

दुनिया किस भी नज़र से देखे

मैंने पिता के चेहरे की झुर्रियाँ देखीं

देखा टूटे सपनों के टुकड़े जोड़कर

सब कुछ सहेजते

हाँ पैर में जूते

हाथ में घड़ी

गले में मोटी सोने की सिकड़ी नहीं थी

लेकिन फिर ये था

इन सब को करने के लिये

बिका ईमान और ज़मीर गिरवी नहीं थी

किसी कागज़ पर दस्तखत करने के लिये

ली कभी रिश्वत नहीं थी

हिस्से में क्या मिला?

से ज्यादा हिस्से

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