गाँव में और शहर में

यह भी एक फर्क़ है

गाँव में मीलों तक

आसमान, तारे और चाँद

मेरा लगता है

और शहर में

मीलों तक क्या

कुछ कदम के बाद

सबकुछ आँख से ओझल रहता है

शहर में आसमान टुकड़ों में

चाँद आधे सेअधिक समय

गायब ही रहता है

तारे भी दो -चार दिखते हैं

आसमान में डाका पड़ा है

ऐसा लगता है

Kadambari Kishore