अब ना रोकिए उसे

दुनिया का हवाला देकर

रस्मों की बात कह कर

रिश्तों और अपनों का सपना दिखाकर

हक़ीक़त की दुनिया

रस्मों का चलन

अलग-अलग हैं

आप रस्मों को भी मानें

हक़ीक़त भी जियें

दो बातें हैं

नदी के एक किनारे की तरह

एक ही समय में साथ-साथ

और अलग-अलग

Kadambari Kishore