अभिमान और स्वाभिमान

के उपसर्ग में जितना ही सूक्ष्म भेद है

इनके अर्थ में उतना ही

विराट अंतर है

जैसे मौन और एकांत

एक दूसरे के पर्याय होकर भी

गूढ अर्थ में भिन्न

Kadambari Kishore