अभिमान और स्वाभिमानके उपसर्ग में जितना ही सूक्ष्म भेद हैइनके अर्थ में उतना हीविराट अंतर हैजैसे मौन और एकांतएक दूसरे के पर्याय होकर भीगूढ अर्थ में भिन्न