मिरि मंजिल तिरा दर है, या भटकना मिरा नसीब पता नही,

मुझे तिरा हर मर्ज पता है, मिरा तबियत मिरा हाल, पता नहीं,


मुझको कभी दिल में बसाया भी, या तिरे पास दिल ही नहीं, पता नही,

मैं सोता कम हूं रातों को, या तू मुसलसल जगता कहीं, पता नही,


मुझमें बस्ता था एक शख्स मुझ जैसा,अब जिंदा भी है, पता नही,

मिरा दिल इतना काहिल भी था, या तू दिल तोड़ने मैं माहिर, पता नही,


कोई जो मरता भी है मिरे पैरों में, मुझ पर एक शिकन तक का पता नही,

आखिर दरिंदा हो गया हूं या तू, तू ही ये बतला दे, मुझको पता नही,


©Kaiz