मुझे फरिश्तों के अक्स में एक साब याद है,

मेरी दो चरखी के पीछे रखा वो हाथ याद है,


अपनी खुशियों को जला कर उसका मुझे गर्मी देना याद है,

मेरे डगमगाते हुए कदमों को उसका वो संभालना याद है,


मेरी सारी बेतुकी ख्वाहिशें उसका पूरा करना याद है,

मेरे संग-संग तपती धूप में उसका वो तपना याद है,


मैं टुटू तो जोड़ना, में रूठूं तो उसका मानना याद है,

मैं बिखरू तो समेटना, मै रोऊं तो हसाना याद है


मुझे फरिश्तों के अक्स में एक साब याद है,

मुझे मेरी ज़िंदगी मेरा बाप याद है,


©Kaiz