थोड़ा बहुत नहीं, बहुत कुछ ले जाउँगा इस जहां से

जब भी जाउँगा इस जहां से

तेरी बेबाक बातें, तेरे बेहिसाब वादे

कुछ तेरी रातों का अंधियारा, कुछ तेरी आँखों का उजियारा

कुछ मेरे अधूरे सपने, कुछ तुम जैसे अधूरे अपने

कुछ तेरे होने का एहसास, कुछ तेरे लबों की प्यास

और भी पता नहीं कितना कुछ, ले जाउँगा इस जहां

जब भी जाउँगा इस जहां से

शायद इसी तरह....

अपने अधूरे इश्क़ को मुकम्मल कर जाउँगा इस जहां से

जब भी जाउँगा इस जहां से ....