पवन का शोर चारो ओर, क्या रिमझिम फुहारें हैं।
हमारे गाँव मे सावन के क्या अद्भुत नज़ारें हैं।
गा रही कोकिला काली,झूमती तरूवर की डाली।
नाचते मोर बागों मे ,हुई खेतों मे हरियाली।
महक सोंधी हुई मिट्टी की ,क्या पुरवा बयारें हैं।
हमारे गाँव मे सावन के क्या अद्भुत नज़ारें हैं।
डालियों पर खिली कलियाँ,भ्रमर भी करते रगंरलियाँ।
झमाझम कर कभी बरसे, कभी बूंदों की हैं लड़ियाँ।
मेघ से मिलने को कब से,धरा बाहें पसारे है।
हमारे गाँव मे सावन के क्या अद्भुत नज़ारें हैं।
बागों मे पड़े झूले ,दामिनी अम्बर मे बोले।
वो परदेशी भी घर आये,गाँव जो अब तक थे भूले।
प्यार त्योहार का मौसम,प्रकृति के रंग ये सारे हैं।
हमारे गाँव में सावन के क्या अद्भुत नज़ारें हैं।
कामिनी मिश्रा


