लहरों मे भी क्या रवानी होती है,
आखिर इनकी भी जवानी होती है।
इनको भी किनारों पर ठहरना पड़ता है,
जीवन सी इनकी भी कहानी होती है।
कभी बहें तुफ़ानी धुन में, कभी शांत मदमस्त चले।
शोर मचाते कभी किनारे ,और कभी चुपचाप बहे।
इनकी भी देखो मनमानी होती है,
जीवन सी इनकी भी कहानी होती है।
चाहें तो कश्ती भी पार उतर जायें,
वरना तो उलझ मझधारों मे ही खो जायें।
करतीं वो ही जो मन मे ठानी होती है,
जीवन सी इनकी भी कहानी होती है।
अक्सर ये साहिल से कुछ कह जातीं हैं,
जैसे ये उनसे ही मिलने आतीं हैं।
इनको भी उर की व्यथा सुनानी होती है,
जीवन सी इनकी भी कहानी होती है।
कामिनी मिश्रा


