सफर जीवन का है हर मोड़ पर मुझको ही पाओगे।हकीकत हूँ तुम्हारी, तुम मुझे कैसे छिपाओगे।झूठ पर झूठ बोलो या लगाओ होंठ पर ताला ।अन्तर्मन की इस आवाज़ को कैसे दबाओगे।
सफर जीवन का है हर मोड़ पर मुझको ही पाओगे।
हकीकत हूँ तुम्हारी, तुम मुझे कैसे छिपाओगे।
झूठ पर झूठ बोलो या लगाओ होंठ पर ताला ।
अन्तर्मन की इस आवाज़ को कैसे दबाओगे।