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हकीकत


सफर जीवन का है हर मोड़ पर मुझको ही पाओगे।

हकीकत हूँ तुम्हारी, तुम मुझे कैसे छिपाओगे।

झूठ पर झूठ बोलो या लगाओ होंठ पर ताला ।

अन्तर्मन की इस आवाज़ को कैसे दबाओगे।

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