उस एक रंग का किस्सा निराला है,

ना चाहते हुए भी सबको रंग डाला है,

लाल रंग से होती जाती पूरी वो माला है,

प्रीत को उसने कुछ अपने रूप में ढ़ाला है,


-© ज्योत्सना अरोड़ा

Jyotsana Arora