कलम टूटी नहीं है जनाब

बस थोड़ा आयाम चाहती है,

लिखते लिखते थक सी गई तो

कुछ पल का ये विश्राम चाहती है,

बंद नहीं होगा लिखना इस कलम का

अब तो ये एक नया परिणाम चाहती है।


-© ज्योत्सना अरोड़ा

Jyotsana Arora