ज़िन्दगी लिखते-लिखते
ना जाने कहांँ चले जाते हैं
एहसास,
कभी लगती उदासी तो कभी
इश्क़ की प्यास,
जब सोचो तो थम से जाते हैं
ये हाथ,
कि क्या ही लिखें अब कैसा है
ज़िन्दगी का साथ,,
- ©Jyotsana Arora


ज़िन्दगी लिखते-लिखते
ना जाने कहांँ चले जाते हैं
एहसास,
कभी लगती उदासी तो कभी
इश्क़ की प्यास,
जब सोचो तो थम से जाते हैं
ये हाथ,
कि क्या ही लिखें अब कैसा है
ज़िन्दगी का साथ,,
- ©Jyotsana Arora