इश्क़ के पन्नों की होती है एक कहानी,
जिसमें छुपी होती है बातें बहुत पुरानी,
वैसे तो कहते हैं इश्क़ होता है ख़ामोशी से,
लेकिन जब तुम आते हो लफ़्ज़ों में तो,
बातें भी बोलती हैं बातें अपनी जुबानी।
बन जाती हैं ग़ज़लें,नज़्में और कहानी,
दिल टूटने की आवाज़ यहांँ किसने है जानी,
आशिक़ तो बहुत होते हैं आशिक़ी में,
लेकिन जब दिल से कोई साथ निभाए तो,
वो इश्क़ हो जाता है फिर रूहानी।
इश्क़ हो इबादत तो ज़रूरत नहीं आजमानी,
इसमें तो ख़ुदा भी ना करता है मनमानी,
सुन लेता है वो भी गर सच्चाई हो दुआओं में,
लेकिन साथ देना हर पल जब वो मिल जाए तो,
तभी मुकम्मल होता है वो इश्क़ रूमानी।
-© ज्योत्सना अरोड़ा


