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चांँद


सीढियांँ चढ़ता है चाँदआसमां में कुछ इस तरह,

जैसेइश्क़ को मिली हो पनाह

आंँखों में जमाने की तरह,,,-© ज्योत्सना अरोड़ा

— © Jyotsana Arora
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