मर तो हम सब गए हैं
बस मौत आनी बाकी है
मुझे हर तरफ ज़िंदा लाशें दिखी
संवेदनहीन
व्यस्त, बेफिक्र
गिरती , पड़ती, भागती
मौत से पहले मरती
सवाल तो लाशों पर बनते है
ज़िंदा लाशें सवाल नही पूछतीं
वो तर्क नही करती
ज़िंदा लाशों में चुप्पी होती है
वो शोर नही करती
वो रो नही सकती
वो व्याकुल नही होती
वो दर्द नही समझती
आये दिन समाज ऐसी लाशें गढ़ता है
आये दिन मौत से पहले मारता है
धर्म, जाति, सम्प्रदाय के नाम पर
कई कारखानों में बनती है ज़िंदा लाशें
जो नोच खाने को तैयार है
दूसरे कारखाने की लाशो को
हमे जीना होगा मौत से पहले
रोना होगा मौत से पहले
अपनाना होगा मौत से पहले
गले लगाना होगा मौत से पहले


